Tuesday, December 4, 2018

आम और खास -कविता

aam and khas poem





                                आम और खास 


             आम और खास में 
              फर्क हे जरा 
              आम फलों का राजा हे 
             तो खास आम का राजा हैं 
              आम आम ही रहता है 
               जब तक वो खास 
             न बन  जाता हैं 
          आम और खास में ----

            आम जब खास हो जाता है 
            तो अपनी पहचान भूल जाता हैं 
            यूँ तो आम भी हे राजा 
           अपनी सुगंध और मिठास का 
           आम के सामने सब हे फीके 
          वो आम ही हे जो चुनते खास को 
           आम और खास में -------


Monday, December 3, 2018

अनाज की बचत

                    अनाज की बचत 







अनाज हे हर एक की जरूरत। 
इसे बर्बाद होने से बचाये। 
भोजन करते समय थाली में उतना ही 
ले जितनी आपकी जरूरत हैं। 
अन्न के एक एक दाने का सही उपयोग 
करना चाहिए। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने 
चावल के एक दाने के माध्यम से जग को यह 
संदेश दिया हैं। 
जिनके कंधो पर अनाज के भण्डारण एवं 
रख रखाव की जिम्मेदारी है वे अपने कर्तव्य 
का सजगता पूर्वक पालन करें। 
अनाज के परिवहन ,भण्डारण के समय भी 
अन्न की हानी होती हैं। 
समाज के सभी वर्ग के लोगों  को उनकी क्रय 
शक्ति के आधार पर अन्न की उपलब्धता 
सुनिश्चित करना चाहिए। कालाबजारी पर 
लगाम लगानी चाहिए। 
अन्न उत्पादक अर्थात किसान को विभिन्न 
योजनाओ के द्वारा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। 
किसान को उनकी मेहनत का उचित मूल्य 
मिलना चाहिए। 

एक तरफ अनाज से भरे गोदाम है। 
दूसरी तरफ भूख से होती हुई मौते हैं। 
व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता हैं। 

Saturday, December 1, 2018

कागजात






     एक तरफ हम जहाँ कम्प्यूटर युग में रह रहे है 
    और कागजात कम करते जा रहे हे. वही  कागज 
   (राशन कार्ड ) के अभाव में किसी को राशन नहीं 
   दिया जाता और भूख से उसकी मौत हो जाती है। 

     हमारा जीवन रिश्तों की डोर में तो बँधा होता ही है 
   साथ ही कागजो की डोर में भी हम जीवन भर उलझे 
   रहते हैं। 
   यदि आपके पास आवश्यक कागजात नहीं है तो फिर 
   आप के बहुत सारे काम अटक जायेंगे या फिर सरकार 
  की बहुत सारी योजनाओं में से शायद किसी भी योजना 
  का लाभ न ले सके। 
   जैसे जैसे मनुष्य सभ्य होता गया वो कागज के अधिक 
  समीप होता गया.इतना अधिक कि बिना कागज के 
  किसी व्यक्ति के जीवित होने तक का अस्तित्व नहीं होता।
    मानव समाज को चलाने के लिए कागज आवश्यक 
   अवश्य है पर इनकी अनिवार्यता पर प्रश्न चिन्ह हैं।