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Sunday, August 15, 2021

15 अगस्त

 मिलकर हम सब काम  करे

वतन को सब आबाद करे

खुशहाली के गीत सुने

मानवता के पथ पे चले

नहीं किसी से कभी न डरे 

साहस के संग आगे बदे

मिलकर हम सब काम करे 

सच्चे मन से देश की सेवा 

लालच का कही हो न बसेरा 

सुख शांति है ध्येय हमारा 

15 अगस्त पर संदेश सुहाना 

हरा भरा हो जीवन सारा ।






Tuesday, June 8, 2021

कोरोंस और मानव जीवन

 कोरोना औऱ मानव जीवन 


मनुष्य का मूल स्वभाव शांति, प्रगति,उन्नति है। मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं जो कि समाज मे रहकर ही अपनी अवस्था अनुसार उन्नति करता है तथा अपने कर्तव्य की पूर्ति करता हैं।जीवन के उत्तर चढाव में सुख अथवा दुख भोगकर अपने जीवन उद्देश्य की सफलता के लिये प्रयासरत रहता हैं।

 समय समय पर महामारी आती है औऱ अपनी ताकत से मनुष्यो को भारी क्षति पहुचाती रही है।

कोरोना से 15 महीने पहले हम परिचित हुए। कोरोना का जन्म स्थान चीन है वहा से यह सारी दुनिया की सैर को चल पड़ा और इंसानों के जीवन को तहस नहस कर डाला।

पिचले 15 माह से हम कोरोना का  सामना कर रहे है।और आशा कर रहे है कि जल्द ही हमे इससे मुक्ति मिले और हमारा जीवन पहले की तरह पतरी पर आ जाये।बहुत सारे लोग इस आशा के साथ ही इस संसार से विदा हो गये।

  चले गये वी लोग 

  जो इस धरा पर रहते थे 

  मीठे सपने जिनकी 

  आँखो में बसा करते थे।

  वैसे तो इस मृत्युलोक में सभी जीवधारियों को जिंदा रहने के लिये संघर्ष करना पड़ता है।मनुष्य भी इसका अपवाद नही है।फिर भी हम सब अपने दुख दर्द भूलकर खुशियो को समेटने का प्रयास जीवन भर करते है।

भारत मे कोरोना के प्रति लोग तब गम्भीर  और सचेत हुए जब सरकार ने मार्च 2020 में लोकडाऊन लगने का फैसला लिया। तब हम सबने सोचा चलो कुछ दिनों की परेशानी है जल्द ही सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। पहले जैसे ही हम अपनी मर्जी के अनुसार जीवन जी सकेंगे।

किन्तु यह कुछ दिन बढ़ते बढ़ते लगभग 15 महीने हो गये। समस्या पहले से भी ज्यादा घातक हो गई। कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर से भी ज्यादा आक्रामक हो गई और अब तीसरी लहर की भी आशंका है।

टीकाकरण शुरू होने से आशा की किरण भी मन मे जगी है।

   जहाँ आशा है

   वहाँ उत्साह है

   संकट की इस घड़ी में

   संजीवनी बूटी यही है।

कोरोना ने न  केवल बहुत जीवन छीन लिये बल्कि इसने इंसानो के जीवन को पूरी तरह झकझोर डाला।जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र न बचा जहाँ कोरोना ने अपना प्रभाव न दिखाया हो।क्या कभी किसी ने कल्पना की थी कि हम अपने ही घरों में केद हो जाएंगे 

स्कूल,,कालेज,बाजार सब बन्द हो जाएंगे।रेल,,बस,ऑटो के पहिये थम जाएंगे जीवन की गति रुज जाएगी।किन्तु ये सब हुआ 


पहले ही जिंदगी में 

दुख दर्द कम नही थे

किस्से वफा की उम्मीद करें 

 अपने ही  वेवफाई कर गये।

गति ही जीवन का सिद्धांत है जिस तरह प्रकति में सर्वत्र गति दिखई देती हे उसी तरह जीवन भी निरन्तर आगे के पथ पर बढ़ता है।यदि इस गति पर विराम लग जय तो इसके दुष्परिणाम अनेक रूपो में सामने आ सकते है।

मनुष्य के मूल स्वभाब में परिवर्त्तन, चिढ़चिढ़ापन,उदासी, मानसिक समस्याएं शारीरिक समस्याएं आदि।

समय बड़ा बलबान है।सभी के लिए यह परीछा की घड़ी है।इस समय को अध्यन,अध्यात्म,चिंतन,मनन,

योग, धर्म के साथ व्यतीत किया जाए तो निश्चय ही उन्नति के नए रास्ते मिलेंगे।

समय चाहे जैसा भी हो

हमे अपनी चाल चलना है

हौसलो के पंख फैलाकर

सुदूर मंजिल को पाना है।







कोरोना से हुई  मोटो ने दिल दहला दिये।कितने ही परिवार बिखर गये।जीवन मे सदा के लिए सूनापन और खालीपन आ गया।

Friday, July 24, 2020

कोरोना से जंग

लड़ो जंग, कोरोना संग
ना रुको, ना झुको
हर हाल मे डटे रहो
धैर्य को साथ लेके
जंग ये लड़ते रहो
होशला खुद  पे  रखो
संघर्ष सदा करते रहो
दिन जल्द ये बदलेंगे
हर हाल मे जीतेंगे 

Wednesday, May 22, 2019

ज़िंदगी रिलेटेड सांग लिस्ट


ज़िंदगी रिलेटेड  सांग लिस्ट 



life songs list











  1. ज़िंदगी एक सफर है सुहाना 
  2. ज़िन्दगी प्यार का गीत हैं 
  3. ज़िंदगी की न टूटे लड़ी 
  4. ज़िंदगी इम्तहान लेती है 
  5. एक रास्ता हे ज़िंदगी 
  6. ज़िंदगी में जीते जीते मरना 
  7. एक प्यार का नगमा है 
  8. रोते हुए आते हे सब 
  9. मैं  ज़िंदगी का साथ निभाता 
  10. जीवन के सफर में राही 
  11. ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हे 



Tuesday, May 21, 2019

जीवन की असली जायदाद


जीवन की असली जायदाद 



real wealth of life




सुखी परिवार और  उसके सभी सदस्य 
मित्र,नाते,रिश्तेदार 
पुण्य कर्म 
समय 
समय का सदुपयोग 
चरित्र 
व्यवहार 
ईमानदारी 
परिश्रम से कमायी शुद्ध आय 
आर्थिक व्यवहार एवं सामाजिक व्यवहार में ईमानदारी 
प्रभु स्मरण 
दान 
अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और पूर्ण समर्पण 
अच्छी सेहत 
आत्म प्रेम 




Friday, May 10, 2019

कल कभी नहीँ आता



time is most important
















 कल कभी नहीँ आता
 काल करें सों आज कर 
 आज करें सों अब 
 पल में प्रलय  होएगी 
 काज करेगो कब 

 आज़ का काम आज ही करना ठीक हैं। 
 काम को टालना अपने आज के साथ 
 न्याय न करना हैं। 
 आयु,शिक्षा,परिस्थिति के अनुसार 
  सभी के लिए कार्य उपलब्ध होता हैं। 
  उस कार्य को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ 
  करना यही श्रेष्ठ मार्ग हैं। 

Sunday, April 28, 2019

संगीत - जीवन का सौन्दर्य एवं आनन्द



  संगीत - जीवन का सौन्दर्य एवं आनन्द 


Music give us happy life




मनुष्य प्राचीनकाल से संगीत प्रेमी रहा हैं। संगीत नीरस जीवन को सरस बना देता हैं। पत्थरो में जान  डाल देता हैं। अंधकार में प्रकाश भर देता हैं। 


मनरूपी पंछी को उन्मुक्त गगन की ऊचाइयां  छूने को मजबूर कर देता हैं।


संगीत का मनुष्य से गहरा सम्बन्ध हैं। यहाँ तक कि संगीत जन्म से मृत्यु तक की यात्रा में हमारे साथ रहता हैं। चाहे नवजात शिशु के जन्म का उत्सव हो 

या उसे ममतामयी माँ के द्वारा लोरियाँ गाकर सुलाना हो। विद्यालय में 

सांस्कृतिक कार्यकम हो या फिर प्रार्थना ,घर में कोई तीज त्यौहार ,विवाह हो संगीत सब जगह साथ होता हैं।


संगीत एक जीवंत कला है। यह नाद  ऊर्जा पर आधारित हैं। इसकी तरंगे ह्रदय को छूती हैं। इनका प्रभाव समस्त प्राणियों ,पेड़ -पौधों पर तो पड़ता है ,जड़ पदार्थो पर भी पड़ता हैं। 

सभी कलाओं में सर्वश्रेष्ठ कला संगीत ही हैं। यह इसलिए क्योकि इसका माध्यम नाद अति सूक्ष्म होता है परन्तु इसका प्रभाव व्यापक होता हैं,नाद मधुर एवं कर्णप्रिय ध्वनि होती हैं। 


संगीत वह ललित कला है जिसमें स्वर और लय के माध्यम से हम अपने भावों को प्रकट करते हैं। गायन ,वादन ,नृत्य तीनों ही संगीत के रूप हैं। 


सम्पूर्ण जगत का  आधार ॐ (ओम ) है जो कि एक नादात्मक ध्वनि हैं। इसका अर्थ हे कि सृष्टि में निरंतर जो घट रहा है उसमें संगीत की भी मुख्य भूमिका रहती हैं। चाहे सृष्टि के सृजन का समय हो या फिर इसके विनाश का ताँडव ,चाहे हर्ष और उल्लास का वातावरण हो या फिर युद्द द्वारा महाविनाश की दुन्दुभि। कहते हैं अयोध्या,किष्किन्धा और लंका सदैव संगीत की ध्वनियों से गुंजायवान रहती थी। 

संगीत में  इतनी शक्ति है कि वह हर तरह के रोगी को निरोगी बना देता हैं। 

वैज्ञानिक शोधों द्वारा यह सिद्ध हो चुका हे कि अनेक रोगों का का उपचार अलग अलग रागो द्वारा किया जा सकता हैं। 


हमें ईश्वर के निकट ले जाने का यह सबसे सरल माध्यम हैं। तभी तो 
सुर,मीरा,तुलसी एवं सूफी संतो ने भक्ति संगीत के माध्यम से अपने ईश की वंदना कर  उन्हें अपने समीप पाया। उन्होंने जन सामान्य को भी इसे अपनाने की सलाह दी। 

संगीत सभी के लिए उपयोगी हैं। यह हर एक की उन्नति एवं विकास में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सहयोगी हैं। यह न केवल हम सबका मनोरंजन करता है बल्कि यह हमें मानसिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर  देता हैं। तन मन को ताजगी से भर देता हैं। 



music give happy life

Monday, January 21, 2019

मनोरंजन के फायदे



Entertainment  must



                         मनोरंजन के फायदे 


मनोरंजन क्या है ?

जो काम करने से मन को आनंद मिलें वह 
मनोरंजन हैं। 

मनोरंजन के फायदे :

शारीरिक एवं मानसिक थकान दूर होती हैं। 
आयु बढ़ती हैं। 
दिल व् दिमाग स्वस्थ रहता हैं। 
शारीरिक ऊर्जा व बल प्राप्त होता हैं। 
तनाव दूर होता हैं। 

मनोरंजन कब करें ?

जब आपके पास कोई दूसरा काम न हो तब आप 
मनोरंजन करें। 
 जब आप काम करते करते थक जाये तब आप मनोरंजन 
कर  सकते हैं। 
काम के साथ साथ भी आप मनोरंजन कर  सकते हैं। 

                                 मनोरंजन के साधन :


मनोरंजन के अनेक साधन हैं। 
स्थान,समय,मूड के अनुसार उनका चयन किया  जा सकता हैं। 
जैसे : संगीत, भ्रमण,फिल्म,लोकसंगीत,सामाजिक कार्यक्रम,
मेल मिलाप,बातचीत,पारिवारिक कार्यक्रम,रीडिंग, खेल 
ऐतिहासिक स्थल आदि। 




Sunday, January 20, 2019

काम की बातें


kam ki bate








काम की बातें 


अपने माता पिता की सेवा करें। 
kam ki bate

पहले विचार करें फिर बोले।

अच्छी पुस्तकें पढ़े।

अपनी दिनचर्या को संतुलित रखें। 

खान पान में सावधानी रखें।

सुबह जल्दी उठे। 

तनाव मुक्त जीवन जिये।

सदा अच्छी संगति में रहें। 

ईश्वर पर विश्वास रखें। 

समय को समझदारी से खर्च करें। 

Thursday, January 10, 2019

मनुष्य और जीव जगत का सम्बन्ध


human and animal





मनुष्य और  जीव जगत का सम्बन्ध 

मनुष्य सदियों से इस धरा पर निवास कर  रहा हैं। 
अपने आसपास के वातावरण के साथ सामंजस्य 
रखकर ही जीवन जिया जा सकता हैं। 
मनुष्य का जीव  जगत से सबंध भी  उतना ही प्राचीन 
है जितना की मनुष्य का इतिहास। दोनों ही एक दूसरे के                      साथ रहते आ रहे हैं। दोनों ही का एक दूसरे पर गहरा 
प्रभाव पड़ता हैं। कभी मित्र कभी शत्रु ?
चूकि मनुष्य अधिक समझदार है इसलिए वह जीव 
जंतुओं का उपयोग अपनी आवश्यकता के अनुसार 
करता हैं। 
इनमें मुख्य आवश्यकताए हे -
आवागमन,दुग्ध पालन,मछली पालन,माँस भछण,शौक,
प्रदर्शन,मनोरंजन,व्यवसाय आदि। 


humanand animan realtion



जब आधुनिक संचार के साधन नहीं थे तब कबूतर संचार का साधन थे,
इसी प्रकार यातायात के प्राचीन साधन बैलगाड़ी,रथ,घोड़ागाड़ी थे। 
जिनका उपयोग आज भी किया जाता हैं। 
भला कुत्ते  वफ़ादारी पर किसे शक होगा।घर में पिंजरे में बंद तोता 
परिवार  सदस्य बन जाता हैं। नाग पूजा की परम्परा भी सदियों से हैं। 
गाय को गौ माता कहते हैं। गाय का दूध तो बेहद उपयोगी हे ही इसके 
अलावा गौमूत्र एवं गोबर भी कम उपयोगी नहीं। 
कोयल की सुरीली तान भला किसे नहीं लुभाती हैं। 
कोऔ को भी पितृपक्ष में विशेष सम्मान प्राप्त हैं। चिड़ियाँ रानी हो 
या बयां का घोंसला इनकी बात ही निराली हैं। 
मनुष्य का जीव जगत से सम्बन्ध मित्रतापूर्ण हैं। इस रिश्तें को 
बनाये रखने का प्रयास सभी को करना चाहिए। 


Sunday, January 6, 2019

स्वस्थ कैसे बनें ?



make healthy



स्वस्थ - तन व मन 



यदि आपको अपने मन को स्वस्थ रखना हे तो 

तन को स्वस्थ रखना होगा। और यदि  तन को स्वस्थ रखना 
हे तो मन को  स्वस्थ रखना होगा। 
अर्थात दोनों ही एक दूसरे पर निर्भर हैं। 
तन को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले 
अपनी आदतों पर ध्यान देने की आवश्यकता हैं। 
आदत वो होती हे जिसके हम धीरे धीरे आदी 
 हो जाते हैं। 
यदि आदते अच्छी नहीं है तो सबसे पहले उन्हें 
ठीक करने की शुरुवात कीजिये। 
अच्छी आदतें  विकसित कीजिये। 
रत को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना 
इससे  शुरुवात कीजिये। 
इससे आप स्वस्थ भी बनेंगे और बुद्धिमान भी। 
मन में अच्छे विचारों को भरते रहिये। 
जब भी मन  में नकारात्मक विचार आये तो उसे दूर 
खदेड़ दे। 
फिजूल की बातो को दिल व् दिमाग में घर न बनाने दे। 
क्योकि यदि आपको अपने आपको स्वस्थ रखना हे 
तो  वो केवल आप ही कर सकते हैं। 


Friday, January 4, 2019

बचपन और बुढ़ापा - कुछ समानता तो कुछ असमानता

new vision


बचपन और बुढ़ापा 




बचपन और बुढ़ापा - कुछ समानता तो कुछ असमानता 



समानता ---


दूसरों पर निर्भरता
जिज्ञासा 
ज़िद 
स्वयं कुछ करने में असमर्थ 
छोटी छोटी इछाये 
छोटे सपनें  पर ख़ुशी अधिक 




असमानता-----



बचपन बाल कीड़ाओ का आनंद 

तो बुढ़ापा बीमारिओं  का बोझ। 



बचपन माता पिता का प्यार 

तो बुढ़ापा अपनों का तिरस्कार।
new vision
 

बचपन निरंतर शारीरिक बल एवं 

विकास की ओर अग्रसर 
तो बुढ़ापा ढलता शरीर,धूमिल इच्छाएँ ,
कमजोरी।
बचपन नई इच्छाएँ ,सपनें,खेल 
तो बुढ़ापा जीवन भर  यादो का लेखा जोखा। 






Tuesday, December 11, 2018

आज का सुख

Enjoy Today


आज का सुख 

आज से बढ़कर दूसरा कुछ भी नहीं हैं। 
आज ही आज का सच हैं। 
आज का कर्म ही कल का फल हैं। 
आज की ख़ुशी आज की ही हैं। 
इसलिए आज में  ही जिए। 
अपने आज में जितने रंग भर सकते हो 
भर लो। 
आज जो तुम्हें काम मिला हैं उसे पूरी 
ईमानदारी  से कर लो। 
तुम यदि अपना आज पूरी तल्लीनता से 
बिताओगे तो तुम्हारा कल निश्चय ही अच्छा 
होगा। 
दोनों कल का दुःख भुला दो और 
आज को अपना बना लो 
खुश रहने का यहीं रहस्य हैं। 

Monday, December 10, 2018

तनाव दूर करे -भाग २

तनाव दूर करे -भाग २ 







तनाव के  अनेक कारण हैं। 
कुछ तात्कालिक होते हे कुछ दीर्घकालिक। 
तनाव का मुख्य कारण यह हे कि हमारे 
सामने ऐसी परिस्थिति आ जाये जिसके लिए 
हम मानसिक रूप से तैयार नहीं होते। 
भूतकाल में घटित घटनाएँ या भविष्य में हो 
सकने वाली संभावित घटनाओं के बारे में 
विचार करना भी तनाव का कारण हैं। 
तनाव के मुख्य कारण हैं -
पारिवारिक,सामाजिक,व्यक्तिगत,आर्थिक।  

Friday, December 7, 2018

लालच बुरी बला




              लालच बुरी बला 



greedyis bad



        बचपन में एक कहानी सुनी थी। 
        एक आदमी के पास एक मुर्गी थी जो 
        रोज सोने का एक अंडा देती थी। 
        एक दिन उस आदमी ने सोचा कि क्यों 
        न मैं इस मुर्गी को मारकर सारे सोने के अंडे 
        एक ही दिन में पा लूँ। तब उसने मुर्गी को 
        मार  दिया। जब उसने देखा कि मुर्गी के 
        पेट में तो एक भी अंडा नहीं हैं। अब उसके 
        पास हाथ मलने के अलावा कुछ बचा नहीं हैं। 

           शिक्षा -लालच का फल सदा बुरा ही होता हैं।

       

Monday, December 3, 2018

अनाज की बचत

                    अनाज की बचत 







अनाज हे हर एक की जरूरत। 
इसे बर्बाद होने से बचाये। 
भोजन करते समय थाली में उतना ही 
ले जितनी आपकी जरूरत हैं। 
अन्न के एक एक दाने का सही उपयोग 
करना चाहिए। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने 
चावल के एक दाने के माध्यम से जग को यह 
संदेश दिया हैं। 
जिनके कंधो पर अनाज के भण्डारण एवं 
रख रखाव की जिम्मेदारी है वे अपने कर्तव्य 
का सजगता पूर्वक पालन करें। 
अनाज के परिवहन ,भण्डारण के समय भी 
अन्न की हानी होती हैं। 
समाज के सभी वर्ग के लोगों  को उनकी क्रय 
शक्ति के आधार पर अन्न की उपलब्धता 
सुनिश्चित करना चाहिए। कालाबजारी पर 
लगाम लगानी चाहिए। 
अन्न उत्पादक अर्थात किसान को विभिन्न 
योजनाओ के द्वारा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। 
किसान को उनकी मेहनत का उचित मूल्य 
मिलना चाहिए। 

एक तरफ अनाज से भरे गोदाम है। 
दूसरी तरफ भूख से होती हुई मौते हैं। 
व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता हैं। 

Saturday, December 1, 2018

कागजात






     एक तरफ हम जहाँ कम्प्यूटर युग में रह रहे है 
    और कागजात कम करते जा रहे हे. वही  कागज 
   (राशन कार्ड ) के अभाव में किसी को राशन नहीं 
   दिया जाता और भूख से उसकी मौत हो जाती है। 

     हमारा जीवन रिश्तों की डोर में तो बँधा होता ही है 
   साथ ही कागजो की डोर में भी हम जीवन भर उलझे 
   रहते हैं। 
   यदि आपके पास आवश्यक कागजात नहीं है तो फिर 
   आप के बहुत सारे काम अटक जायेंगे या फिर सरकार 
  की बहुत सारी योजनाओं में से शायद किसी भी योजना 
  का लाभ न ले सके। 
   जैसे जैसे मनुष्य सभ्य होता गया वो कागज के अधिक 
  समीप होता गया.इतना अधिक कि बिना कागज के 
  किसी व्यक्ति के जीवित होने तक का अस्तित्व नहीं होता।
    मानव समाज को चलाने के लिए कागज आवश्यक 
   अवश्य है पर इनकी अनिवार्यता पर प्रश्न चिन्ह हैं। 

Sunday, November 25, 2018

स्वस्थ तन -स्वस्थ मन

Be Healthy


स्वस्थ तन -स्वस्थ मन 

यदि आपको स्वस्थ रहना हे तो आपको अपने 
तन एवम मन को स्वस्थ रखना होगा। 
मन को स्वस्थ रखने के लिए तन को और 
 तन को स्वस्थ रखने के लिए मन को स्वस्थ 
रखना होगा। अर्थात दोनों ही एक दूसरे पर 
निर्भय हैं। 
तन को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले 
अपनी आदतों पर ध्यान देने की आवश्यकता 
हैं। आदत वो होती हे जिसके हम धीरे धीरे 
आदी हो जाते हैं। यदि आदतें अच्छी नहीं हे तो 
सबसे पहले उन्हें ठीक करिए। अच्छी आदतें 
विकसित कीजिए। 
रात  को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना 
इससे शुरूआत करें। इससे आप स्वस्थ भी 
बनेंगे और बुद्धिमान भी। 
मन में अच्छे विचारो को भरते रहिए। 
 जब भी मन में नकारात्मक विचार आये 
उसे दूर खदेड़ दे। 


Thursday, November 15, 2018

मनोरंजन ---






entertainment








           मनोरंजन ---                                                मनोरंजन एक वैकल्पिक विषय नहीं है बल्कि यह 

 हर एक की जरूरत हैं। 

  मनोरंजन केवल घर में बैठकर  टेलीविजन कार्यकम 

  देखना या फिर इंटरनेट पर समय बिताना भर नहीं हैं। 

               मनोरंजन तब से है जब से यह जीवन हैं। 

               अर्थात जहाँ जीवन हे वहाँ  मनोरंजन भी अवश्य हैं। 

               इसकी आवश्यकता न केवल इंसानो को है जगत के 

                       सभी प्राणियों को हैं। 

               जिस तरह भोजन से हमें  शारीरिक बल मिलता हे 

  उसी तरह मनोरंजन से हमें  मानसिक बल मिलता हैं। 

सुखी जीवन का आधार हे यह मनोरंजन। 

  मनोरंजन के अनगिनत साधन हैं। कुछ हमें मुफ्त में 

  मिल जाते हे तो कुछ पर हम धन खर्च करते हैं। 

मनोरंजन का मजा सामूहिक भी लिया जा सकता हे 

  या व्यक्तिगत भी। 
     
         अपनी पसंद के साधनों को चुने और स्वस्थ रहें। 
                  

Tuesday, September 18, 2018

कैसे जिए ?



               
new vision

                                                                                                     कैसे जिए ?
   
                        जब थकान हो जाये 
                         तब थोड़ा विश्राम करें 

                       जब तनाव चला आये 
                            तब विचार शुन्य हो जाये 

                        जब बात हद से ज्यादा बढ़ जाये 
                               तब शांत हो जाये 
    
                         जब क्रोध आ जाये 
                                तब उसे पी जाये 

                        जब अविश्वास हो जाये 
                                तब विश्वास के फल तोड़ लाये 

                         जब उदास हो जाये 
                               तब ईश्वर का स्मरण कर लें 

                         जब आंनद का क्षण आये 
                                  तब खुलकर जी लें 

                          जब दुःख आ जाये 
                                 तब सुख का क्षण  याद कर लें 

                            जब परेशानी आ जाये 
                                   तब साहस को बुला लें 
                    
                              जब विपत्ति आ  जाये 
                                     तब धेर्य रख लें 

                              जब शत्रु से सामना हो जाये 
                                     तब डटकर सामना कर लें 

                              जब बीमारी आ जाये 
                                    तब उपचार करा लें 

                             जब सब कुछ ठीक हो जाये 
                                                       तब ईश्वर को धन्यवाद दे लें।