नर्मदे हर.......
नर्मदे हर !नर्मदे हर !नर्मदे हर !
जीवन की सारी दुविधा को हर ।
कम क्रोध मद लोध में फंसकर
भटक रहे हम डगर डगर ,
भक्ति का हमे अमृत दे दो
जीवन में शक्ति को भर दो ।
नर्मदे हर !नर्मदे हर ! नर्मदे हर !
जीवन की सारी दुविधा को हर ।
निर्मल शीतल जल है पावन
दर्शन अनुपम है मनभावन,
तट पर चलकर जो है आते
सुख सागर में वो खो जाते ।
नर्मदे हर !नर्मदे हर !नर्मदे हर !
जीवन की सारी दुविधा को हर ।
मां की महिमा जो है जाने
जीवन में वो सब कुछ पावे,
नर्मदे हर ! जो धूनी रमावे
सब विपदा से मुक्ति पावे।
नर्मदे हर !नर्मदे हर !नर्मदे हर !
जीवन की सारी दुविधा को हर ।
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